Monday, August 15, 2011
जिंदगी की दौड़
बैठ के सोचता हूँ कभी, की थक हार चुका हूँ मैं
कई मीलों लम्बे रास्ते, कर तय चुका हूं मैं
आगे बढ़ने की यह आग, पर जलती ही रहेगी
यह तो जिंदगी की दौड़ है, यह चलती ही रहेगी
ऊचीं मंजिलों को छू कर, कल हो जाऊंगा मशहूर
लिए दिल में यह तमन्ना, आया वतन से मैं दूर
कभी सागर खुशी के, नदी अश्रों की बहेगी
यह तो जिंदगी की दौड़ है, यह चलती ही रहेगी
यारों हौसले भी दिए, कुछ ने निंदा है सुनाई
मेरी जिंदगी की चाल , कई ठोकरें है खाई
ले के ख़ुदा का सहारा , राह यह मंजिल की है पाई
एक छूई है, कई बची हैं, कतार बनती ही रहेगी
यह तो जिंदगी की दौड़ है, यह चलती ही रहेगी
लाख सिकंदर यहाँ हैं आए, कई पोरस जंग हराए
राजे लूट है महल बनाये, चले गए दुनिया को समझाए
तेरे कफ़न वाली ज़ेब, आखिर खाली ही रहेगी
पर यह तो जिंदगी की दौड़ है, यह चलती ही रहेगी
गुरी यह जिंदगी की दौड़ है, यह चलती ही रहेगी
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gurry kamal kar dita
ReplyDeletedil khush kar ditaa ladke
majja aa gaya
kamaal hai....
I forgot I was reading YOU.
ReplyDeleteDamn it. This is so good.
Keep up dude.
deep!
ReplyDeletewell written :)